कटिहार [ बिहार ]_
पारम्परिक खेती के साथ साथ आमदनी को बढ़ाने के लिए किसान अपना रहे हैं नई खेती के गुर ,,बिहार के कटिहार में विकल्प के रूप में तेजी से बढ़ रही है ''मशरूम की खेती '',,विभाग दिला रहे हैं मदद का भरोसा , अपने ही घर में छोटे से हिस्से में बेहद कम लागत से महरूम की खेती करते रणजीत आमतौर पर अन्य खेती से भी जुड़े हुए हैं लेकिन ज़मीन की कमी ,अधिक लागत और पुरे समय देने के बावजूद कई बार पारम्परिक खेती अलग अलग वजह से धोखा दे चुकी है इसीलिए अब विकल्प के तौर पर अपने ही घर के छोटे हिस्से पर मशरूम की खेती शुरू की है ,मशरूम की खेती से अब रणजीत बेहद संतुष्ट हैं और अब आगे इसे बड़े पैमाने पर करने का विचार कर रहे हैं। वो कहते हैं की इस खेती को करने में लागत काफी कम अधिक मुनाफा के साथ समय की भी बचत हो जाती है ,वो दुसरे किसानो को भी इस खेती को करने की सलाह देते हैं .जिला कृषि विभाग भी विकल्प के तौर पर किसानो द्धारा अपनाये जा रहे मशरूम की खेती से बेहद उत्साहित हैं ,जिला कृषि पदाधिकारी चन्द्रदेव प्रसाद कहते हैं की इस तरह मशरूम की खेती करने वाले किसानो को जागरूक और प्रोत्साहित करने के लिए विभाग योजना बना रही है ताकि ज़मीन नहीं होने के बावजूद कम लागत की खेती को कटिहार के किसान अपना सके।
पारम्परिक खेती के साथ साथ आमदनी को बढ़ाने के लिए किसान अपना रहे हैं नई खेती के गुर ,,बिहार के कटिहार में विकल्प के रूप में तेजी से बढ़ रही है ''मशरूम की खेती '',,विभाग दिला रहे हैं मदद का भरोसा , अपने ही घर में छोटे से हिस्से में बेहद कम लागत से महरूम की खेती करते रणजीत आमतौर पर अन्य खेती से भी जुड़े हुए हैं लेकिन ज़मीन की कमी ,अधिक लागत और पुरे समय देने के बावजूद कई बार पारम्परिक खेती अलग अलग वजह से धोखा दे चुकी है इसीलिए अब विकल्प के तौर पर अपने ही घर के छोटे हिस्से पर मशरूम की खेती शुरू की है ,मशरूम की खेती से अब रणजीत बेहद संतुष्ट हैं और अब आगे इसे बड़े पैमाने पर करने का विचार कर रहे हैं। वो कहते हैं की इस खेती को करने में लागत काफी कम अधिक मुनाफा के साथ समय की भी बचत हो जाती है ,वो दुसरे किसानो को भी इस खेती को करने की सलाह देते हैं .जिला कृषि विभाग भी विकल्प के तौर पर किसानो द्धारा अपनाये जा रहे मशरूम की खेती से बेहद उत्साहित हैं ,जिला कृषि पदाधिकारी चन्द्रदेव प्रसाद कहते हैं की इस तरह मशरूम की खेती करने वाले किसानो को जागरूक और प्रोत्साहित करने के लिए विभाग योजना बना रही है ताकि ज़मीन नहीं होने के बावजूद कम लागत की खेती को कटिहार के किसान अपना सके।
प्राकृतिक आपदा और उदयोग विहीन कटिहार में रोजगार के लिए पलायन मज़बूरी बन गई है ऐसे में युवा किसान रणजीत के दिखाए गए राह और कृषि विभाग की मदद से अगर रोजगार की नई राह सृजित हो सके तो ये एक अच्छा पहल साबित हो सकता है।



0 टिप्पणियाँ:
एक टिप्पणी भेजें