बिहार [ कटिहार ]_असदुर रहमान __कटिहार के एक पंचायत में बंदरो के आतंक से विकाश बाधित हो गया है ,गांव के लोगो से ज्यादा बंदरो की सख्या है ,अब लोग खेती बारी बर्वाद होने के बाद गांव छोर कर बंदरो के आतंक से पलायन करने लगे है , कटिहार के प्राणपुर विधान सभा के बरझला पंचायत के हरफरा और धीरगंज गांव के लोग इन दिनों काफी परेसान हैं , , बिहार सरकार के खनन मंत्री बिनोद सिंह के विधान सभा के जुड़े इस गांव में लोग संभ्रांत होने के बाबजूद इन दिनों पलायन के लिए मजबूर है ,पलायन के पीछे के कारण है वह आप के लिए भले ही मजाक लगे लेकिन इससे जुड़े परेशानी कितनी है ये आप यहां के ग्रामीणों से सुन सकते हैं , दरअसल इस गांव में लगभग 25 सालो से बंदरो का आतंक है और अब तो इस आतंक की अति हो चुका है , इस गांव के अधिकतर लोग खेती से जुड़े हुए है ,मगर बंदरो ने खेत को बर्वाद कर दिया है और अब पलायन ही एक मात्र विकल्प रह गया है ,गांव के लोगो के माने तो यहां बंदरो की सख्या दर्जनों में नहीं सैकड़ो में नहीं बल्कि हजारो में पहुंच चूका है और इस गांव के लोगो की
सख्या अब हजार से निचे है , मज़बूरी ऐसी की अब लोग इस गांव में बेटी की शादी नहीं देना चाहते है , वही गांव के एक मात्र प्रथमिक विद्यालय पर हमेशा छात्र -छात्रा और शिक्षकों में बंदरो का खौफ मंडराते रहता है , स्थानीय मुखिया और जिला परिषद लड्डू सिंह के माने तो ये स्थानीय स्तर पर एक बड़ी समस्या है ,शासन ,प्रशासन और सरकार तक इसे लेकर गुहार लगाया जा चूका है ,लेकिन अब तक कोई पहल हुआ है ,लोग चाहते है की समुचित व्यवस्था के साथ बंदरो के आतंक से इस गांव को मुक्ति मिले ,,,बढ़ते बिहार के विकाश के दावे के बीच एक गांव में अगर बंदरो के आतंक के कारण विकाश पूरी तरह ठप हो जाए और लोग रोजी रोटी के लिए पलायन को मजबूर हो जाए तो इस पर कोई पहल तो करना ही पड़ेगा ,,ताकि विकाश पर बन्दर तंत्र हावी ना हो जाये ,,,
सख्या अब हजार से निचे है , मज़बूरी ऐसी की अब लोग इस गांव में बेटी की शादी नहीं देना चाहते है , वही गांव के एक मात्र प्रथमिक विद्यालय पर हमेशा छात्र -छात्रा और शिक्षकों में बंदरो का खौफ मंडराते रहता है , स्थानीय मुखिया और जिला परिषद लड्डू सिंह के माने तो ये स्थानीय स्तर पर एक बड़ी समस्या है ,शासन ,प्रशासन और सरकार तक इसे लेकर गुहार लगाया जा चूका है ,लेकिन अब तक कोई पहल हुआ है ,लोग चाहते है की समुचित व्यवस्था के साथ बंदरो के आतंक से इस गांव को मुक्ति मिले ,,,बढ़ते बिहार के विकाश के दावे के बीच एक गांव में अगर बंदरो के आतंक के कारण विकाश पूरी तरह ठप हो जाए और लोग रोजी रोटी के लिए पलायन को मजबूर हो जाए तो इस पर कोई पहल तो करना ही पड़ेगा ,,ताकि विकाश पर बन्दर तंत्र हावी ना हो जाये ,,,








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