बिहार [ कटिहार ]_
वैसे तो देश के मिट्टी के कण -कण में देश प्रेम की कई गाथाएं सिमटी हुई है ,मगर आज बात कटिहार के एक ऐसे गांव की करते है जहा लगभग हर घर से देश के शरहद से जुड़े जाबाज सैनिको का सीधा वास्ता है ,कटिहार के मिर्जापुर बघार में लगभग 500 सौ घर के कोई ना कोई सदस्य सीधे तौर पर सेना से जुड़े हुए है ,
" यह गांव है वीर जवानो का " ,, इस गांव का क्या कहना , हर घर से देश प्रेम के लिए जूनून सवार वीरो की कई कहानी को समेटे यह कटिहार मनिहारी प्रखंड के मिर्जापुर बघार गांव है , वैसे तो लगभग 500 सौ घरो की सेना से जुड़े परिजनों के लिए सेना तक सफर तय करने की अलग -अलग कहानी है ,मगर शुरुवात उस घर से करते है जहा एक बेटा कारगिल के जंग में शहीद हो चूका है और दूसरा बेटा अब भी शरहद पर देश के दुश्मनो से लोहा ले रहा है ,जबकि जिंदगी की आखरी पलो को समेटे हुए पिता राम सरूप यादव को कोई सिकन नहीं है ,वह चाहते है की उनका बेटा शम्भू यादव BSF में नौकरी के दौरान जिस तरह कारगिल के जंग में शहादत दिये थे उनके घर से ही नहीं बल्कि समाज से और युवा सामने आये और शरहद के लिए मर मिटने के लिए तैयार रहे ,,,आज भी इस घर की चौखट पर भले ही चकाचौंद मार्वल ,टायलस ना लगा हो मगर 26 जनवरी और 15 ऑगस्त को वृद्ध पिता अपने बेटे के याद में तिरंगा लहरा कर अपने वीर सपुत्र शम्भू को सलामी देते है ,
स्थानीय लोगो ने वीर सपूतो के याद में गांव के प्रवेश द्वार पर एक शहीद द्वार जरूर बनाया है ,लेकिन अब तक वह पूरा नहीं हो पाया ,है गांव के लोग कहते है की इस गांव में देश प्रेम की जज्वा ऐसा है की मानो हर घर का बच्चा सेना में जाने के लिए ही यहां जन्म लेता है , कुछ लोग तो ऐसे भी मिले जिनके घर से सभी भाई शरहद के किसी ना किसी मोर्चे पर दुश्मनो से लोहा ले रहे है , सच में आजादी के बाद आज भी कई सुविधाओं से मेहरूम मनिहारी प्रखंड के सुदूर इलाके में स्थित मिर्जापुर गांव एक मिशाल है ,,





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