बिहार [ कटिहार]___देश की आज़ादी में भारत के कई वीर सपूतों ने अपना अहम् योगदान दिया है ,जिसमे स्वतंत्रता सेनानियों का भी अहम् योगदाम रहा है जिसमे कटिहार शहर के दुर्गास्थान मोहल्ले के रहने वाले 98 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी कवि सौरभ का भी अहम् भूमिका रहा है ,,सवतंत्रता सेनानी कवी सौरव आज फिर एक लड़ाई लड़ रहे हैं जिसमे वो किन्नरों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास के लिए संघर्षरत कर रहे हैं । आजादी के संग्राम में अहम भूमिका निभाने वाले सौरभ उसी जोश और उत्साह के साथ किन्नरों के हक की लड़ाई भी लड़ रहे हैं। समाज के दबे-कुचले लोगों के पक्ष में सदैव खड़े रहना उनका स्वभाव बन चुका है। विभिन्न स्त्रोतों से वे ऐसे लोगों की आवाज संसद से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाते रहे हैं। किन्नरों को लैंगिक व भाषाई शुद्धता दिलाने के लिए भी उनका लंबा संघर्ष चला है और अभी भी जारी है। सवतंत्रता सेनानी कहते हैं की आज जब लोग देश को INDIA के नाम से पुकारते हैं तो उन्हें अंग्रेजों की याद फिर ताज़ा हो जाती है क्योंकि INDIA नाम ये अंग्रेजों की दें है ,हमें अपने देश से मोहब्बत है तो इसे हमें हिन्दुस्तान या फिर भारत के नाम से ही पुकारना चाहिए मोर आने वाली पीढ़ी इसे हमेसा याद रख सके ,भाषा अंग्रेजी में ना लिखकर हिंदी में लिखना क्हैये और इसकी शुद्धता जरुरत है ,शून्य की खोज हमारे बिहार के ही वैज्ञानिक की खोज है।
स्वतंत्रता सेनानी कवी सौरव की कहानी ,उनकी जुबानी
बिहार [ कटिहार]___देश की आज़ादी में भारत के कई वीर सपूतों ने अपना अहम् योगदान दिया है ,जिसमे स्वतंत्रता सेनानियों का भी अहम् योगदाम रहा है जिसमे कटिहार शहर के दुर्गास्थान मोहल्ले के रहने वाले 98 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी कवि सौरभ का भी अहम् भूमिका रहा है ,,सवतंत्रता सेनानी कवी सौरव आज फिर एक लड़ाई लड़ रहे हैं जिसमे वो किन्नरों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास के लिए संघर्षरत कर रहे हैं । आजादी के संग्राम में अहम भूमिका निभाने वाले सौरभ उसी जोश और उत्साह के साथ किन्नरों के हक की लड़ाई भी लड़ रहे हैं। समाज के दबे-कुचले लोगों के पक्ष में सदैव खड़े रहना उनका स्वभाव बन चुका है। विभिन्न स्त्रोतों से वे ऐसे लोगों की आवाज संसद से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाते रहे हैं। किन्नरों को लैंगिक व भाषाई शुद्धता दिलाने के लिए भी उनका लंबा संघर्ष चला है और अभी भी जारी है। सवतंत्रता सेनानी कहते हैं की आज जब लोग देश को INDIA के नाम से पुकारते हैं तो उन्हें अंग्रेजों की याद फिर ताज़ा हो जाती है क्योंकि INDIA नाम ये अंग्रेजों की दें है ,हमें अपने देश से मोहब्बत है तो इसे हमें हिन्दुस्तान या फिर भारत के नाम से ही पुकारना चाहिए मोर आने वाली पीढ़ी इसे हमेसा याद रख सके ,भाषा अंग्रेजी में ना लिखकर हिंदी में लिखना क्हैये और इसकी शुद्धता जरुरत है ,शून्य की खोज हमारे बिहार के ही वैज्ञानिक की खोज है।



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