कटिहार [ बिहार ]__बिहार के कृषि मंत्री डॉक्टर प्रेम कुमार एक बार फिर चर्चा में हैं। दरअसल आजकल वो नित्य नये घोषणा करते है लेकिन उनकी घोषणा कितनी जमीन पर उतर रही है उसकी एक बानगी से आपको रूबरू कराता हूं।कटिहार के साथ साथ बिहार के कई जिलों में बीते साल मक्का में दाना नहीं आने से परेशान किसानो को माननीय मंत्री प्रेम कुमार जी ने मुआवजा देने की घोषणा की थी मगर एक साल बीत जाने के बाद भी अब तक किसानो को मुआवजा नहीं मिला जिससे किसान परेशान है । वहीँ मंत्री जी हैं कि इन सब से बेखबर नित्य नयी कंपनियों के साथ मिलकर किसानों को घटिया बीज जबरन देने का बीड़ा उठा रखे हैं।कटिहार के इलाके की पहचान खेती के मामले में मक्के से विशेष रूप से जुडी हुई है ,यहाँ के किसान मक्का को ”डायमंड दाना ”भी कहते हैं ,मगर बीते साल गलत खाद बीज के कारण बड़े पैमाने पर कटिहार के किसानो को मक्का में दाना नहीं आने से क्षति हुई थी जिसके बाद कृषि मंंत्री ने जांच कर मुआवजा देने की घोषणा भी की थी मगर एक साल पूरा होने के बाद भी किसानो को मुआवजा नहीं मिला है।
वहीँ कटिहार जिला कृषि पदाधिकारी इस मामले पर हाथ खड़े करते हुए सरकार के तरफ से अबतक कोई दिशा निर्देश नहीं मिलने की बात कह रहे हैं।
अब सवाल उठता है कि क्या सुशासन बाबू अपने मंत्रीमंडल के वरीय मंत्री और स्वंयभू मुख्यमंत्री के दावेदार प्रेम बाबू से इस “भ्रष्टाचार के सागर” में डूबे कृषि मंत्रालय के बारे में कुछ पूछेंगे या इनके साथ अपनी पूरी सरकार को किसानों का कोपभाजन बनवाऐंगे। ऐसे किसानों के गुस्से को प्रधानमंत्री आदरणीय नरेंद्र मोदीजी तीन स्टेट के चुनाव में महसूस कर चुके हैं। हलांकि यह कृषि मंत्रालय की एक छोटी सी बानगी है।
अब सवाल उठता है कि क्या सुशासन बाबू अपने मंत्रीमंडल के वरीय मंत्री और स्वंयभू मुख्यमंत्री के दावेदार प्रेम बाबू से इस “भ्रष्टाचार के सागर” में डूबे कृषि मंत्रालय के बारे में कुछ पूछेंगे या इनके साथ अपनी पूरी सरकार को किसानों का कोपभाजन बनवाऐंगे। ऐसे किसानों के गुस्से को प्रधानमंत्री आदरणीय नरेंद्र मोदीजी तीन स्टेट के चुनाव में महसूस कर चुके हैं। हलांकि यह कृषि मंत्रालय की एक छोटी सी बानगी है।






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