बिहार [कटिहार ]___असदुर रहमान __साहब में विधवा हूँ ,सेविका पद का लाभ मुझे दे दो .
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| कोर्ट का शपथ पत्र_विधवा हूँ |
कटिहार में इंसानियत का झकझोर देने वाला मामला सामने आया है ,जहाँ एक पीड़ित विधवा को अपने विधवा होने का प्रमाण समाज के सामने देने को मजबूर होना पड़ रहा है , मौजूद अधिकारी भी समाज की बातों को महत्व देते हुए कोर्ट द्वारा विधवा होने के प्रमाणपत्र देने के बावजूद कहते हैं की सामाज जो कहता है वही सही ,
नाम _सोनिया कुमारी _उम्र _लगभग 19 साल ,पति__स्वर्गीय जयहिंद कुमार ,ग्राम _गोबिंदपुर ,थाना _रौतारा _जिला _कटिहार,,,,,,, गुजर जाने बाद विधवा होने का दर्द है ,अकेले रहने का दर्द किया होता है वो एक पीड़ित ही बता सकती है ,वहीँ अगर समाज लोग किसी दूसरे इंसान को विशेष फायदा दिलाने खातिर पीड़िता का अंतर आत्मा को ठेस पहुंचता है तो इससे बड़ा गुनाहगार कोई नहीं होता है ,यहाँ कुछ ऐसा ही हुआ है ,
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| पीड़ित के पति का मृत्यु प्रमपत्र |
साहब में विधवा हूँ '' पूरा मामला ये है की राजवाड़ा पंचायत के वार्ड नंबर 02 में आंगनबाड़ी केन्द्र के सेविका पद की बहाली हो रही थी ,जिसे लेकर पीड़ित सोनिया कुमारी ने आवेदन किया था ,,लेकिन समाज के कुछ लोगों ने अपने उम्मीदवार को फायदा दिलाने की खातिर पीड़िता को तंग करना शुरू किया और उसे अपने विधवा होने का प्रमाण पेश करने को कह डाला ,इसके बाद पीड़िता ने कटिहार न्यायलय से अपने शपथ पत्र के माध्यम से अपने विधवा होने का प्रमाण पेश करते हुए सेविका पद का लाभ उसे मिलना चाहिए इसपर अपनी मांग तेज कर दी ,आवेदन करते समय पीड़िता ने सरकारी बाबुओं द्वारा अस्पताल में बनाये गए अपने पति का मृत्यु प्रमाणपत्र भी लगाया ,लेकिन उसी पंचायत के वार्ड सदस्य और मुखिया ने मिलकर एक प्रमाणपत्र स्थानीय लोगों हस्ताक्षर कर बनाया जिसमे वार्डसदस्य ने पीड़िता को शादी शुदा दिखा कर सेविका पद का लाभ दूसरे उम्मीदवार को दिला दिया ,अब पीड़िता अपने विधवा होने का प्रमाण लेकर समाज से इन्साफ की गुहार लगा रही है। वहीँ वार्ड सदस्य पीड़ित सोनिया के पति के मृत्यु की बात को स्वीकार करते हुए ,बेसर्मी की हद पार करते हुए कहते हुए की पीड़िता ने दूसरी शादी है इसीलिए इसका लाभ उसे नहीं मिल सकता है। वहीँ जांच अधिकारी और बहाली की प्रक्रिया करने पहुंची बाल विकास परियोजना की महिला पर्यवेक्षिका समाज के लोग जो कहेंगे वही सही है ,जबकि वो कोर्ट के शपथ पत्र को भी मानती है ,इससे लगता है की मामले में कहीं न कही कुछ गड़बड़ तो है।


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