बिहार [कटिहार ]_असदुर रहमान __विकास नही तो वोट नही के साथ लोग कर रहे हैं वोट का बहिष्कार .
आज़ादी के 70 दशक बाद भी कटिहार के कुछ गाँव की तस्वीर आजतक नहीं बदल पाई ,लोकतंत्र में मताधिकार का काफी महत्व होता है ,और यहाँ चुनाव महापर्व के रूप में लोग मानते हैं ,लेकिन आज़ादी के बाद भी बदलाव नहीं होने से यहाँ के मनसाही और बरारी प्रखण्ड के कुछ गाँव के लोगों ने वोट बहिष्कार का मन बनाया है ,हाथो में वोट बहिष्कार की तख्ती लिए ये लोग जनप्रतिनिधियों से नाराज है और गाँव में विकास नहीं होने से नाराज होकर वोट के बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया है ,ये तस्वीर कटिहार के बरारी प्रखण्ड के बिशनपुर पंचायत के हैं जहाँ लगभग तीन हज़ार की आबादी है ,यहाँ के लोगों का कहना है की आजादी के बाद से ही पुल निर्माण की मांग हो रही है वही वही 1970 में ही गंगा कटाव के बाद यहां लोग वसे है लेकिन वासगीत पर्चा अबतक नही मिल पाया है जिससे आवास योजना से भी लोग वंचित है , यह गांव 1986 में बकिया विशनपुर से गंगा से कटकर बसा है और बिहार सरकार के जमीन पर लोग बसे है गांव से निकलने के लिए सड़क है लेकिन बांध के पास धार है जो बाढ़ के समय पानी से भड़ जाता है इसमें पुल निर्माण की मांग होते आ रही है लेकिन सिर्फ धोषणा होकर रह गयी है अबतक पुल निर्माण हो पाया है ,नाराज लोगों ने अब वोट बहिष्कार का मन बनाया है और जब तक मांगे पूरी नहीं होती है यहाँ के लोग वोट बहिष्कार करते रहेंगे।

यही हाल कटिहार के मनसाही प्रखण्ड के लहसा गाँव का भी है ,जहाँ आज़ादी के बाद से अब तक गाँव के मुख्य सड़क का निर्माण नहीं हो पाने के कारण नेताओं की इंट्री पर रोक लगा दी गई है ,और लोग ''रोड नहीं तो वोट नहीं ''के नारे के साथ पूरा गाँव गूंज रहा है ,लोगों का कहना है की तीन साल पहले मुख्य सड़क पर सिर्फ गिट्टी डाल कर इसे अर्ध निर्मित हालत में छोर दिया गया ,इस बारे में ग्रामीणों ने लगभग सभी प्रतिनिधियों के दरवाजे पर दस्तक दी मगर किसी ने इस पर ग्रामीणों के पक्ष में आश्वासन के सिवा कोई ठोस पहल नहीं की ,अब ग्रामीण लोकतंत्र के इस महापर्व के बेला में नाराज है की जब उनलोगो के मांग पर कोई प्रतिनिधि सुनते ही नहीं है तो विकास के नाम पर वोट क्यों ,नाराज ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से प्रदर्शन करते हुए प्रशासन को भी अपने भावनाओ से अवगत करवा दिया की इस गांव के लोगो ने रोड नहीं तो वोट नहीं का निर्णय मज़बूरी में नेताओ की वादा खिलाफी पर लिया है , 18 अप्रेल को है ,ऐसे में लोगों का ये विरोध जनप्रतिनिधियों के लिए सरदर्द शाबित हो सकता है ,वैसे जो भी नेता जीत कर जाते हैं लोगों से किये इन वादों पर जरूर सोचना चाहिए ताकि लोग इस तरह के कदम ना उठाये। वैसे हमारी ये अपील है की लोग अपने मताधिकार का प्रयोग जरूर करें ,क्योंकि आपका मत हो मजबूत लोकतंत्र का निर्माण करता है।
आज़ादी के 70 दशक बाद भी कटिहार के कुछ गाँव की तस्वीर आजतक नहीं बदल पाई ,लोकतंत्र में मताधिकार का काफी महत्व होता है ,और यहाँ चुनाव महापर्व के रूप में लोग मानते हैं ,लेकिन आज़ादी के बाद भी बदलाव नहीं होने से यहाँ के मनसाही और बरारी प्रखण्ड के कुछ गाँव के लोगों ने वोट बहिष्कार का मन बनाया है ,हाथो में वोट बहिष्कार की तख्ती लिए ये लोग जनप्रतिनिधियों से नाराज है और गाँव में विकास नहीं होने से नाराज होकर वोट के बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया है ,ये तस्वीर कटिहार के बरारी प्रखण्ड के बिशनपुर पंचायत के हैं जहाँ लगभग तीन हज़ार की आबादी है ,यहाँ के लोगों का कहना है की आजादी के बाद से ही पुल निर्माण की मांग हो रही है वही वही 1970 में ही गंगा कटाव के बाद यहां लोग वसे है लेकिन वासगीत पर्चा अबतक नही मिल पाया है जिससे आवास योजना से भी लोग वंचित है , यह गांव 1986 में बकिया विशनपुर से गंगा से कटकर बसा है और बिहार सरकार के जमीन पर लोग बसे है गांव से निकलने के लिए सड़क है लेकिन बांध के पास धार है जो बाढ़ के समय पानी से भड़ जाता है इसमें पुल निर्माण की मांग होते आ रही है लेकिन सिर्फ धोषणा होकर रह गयी है अबतक पुल निर्माण हो पाया है ,नाराज लोगों ने अब वोट बहिष्कार का मन बनाया है और जब तक मांगे पूरी नहीं होती है यहाँ के लोग वोट बहिष्कार करते रहेंगे।

यही हाल कटिहार के मनसाही प्रखण्ड के लहसा गाँव का भी है ,जहाँ आज़ादी के बाद से अब तक गाँव के मुख्य सड़क का निर्माण नहीं हो पाने के कारण नेताओं की इंट्री पर रोक लगा दी गई है ,और लोग ''रोड नहीं तो वोट नहीं ''के नारे के साथ पूरा गाँव गूंज रहा है ,लोगों का कहना है की तीन साल पहले मुख्य सड़क पर सिर्फ गिट्टी डाल कर इसे अर्ध निर्मित हालत में छोर दिया गया ,इस बारे में ग्रामीणों ने लगभग सभी प्रतिनिधियों के दरवाजे पर दस्तक दी मगर किसी ने इस पर ग्रामीणों के पक्ष में आश्वासन के सिवा कोई ठोस पहल नहीं की ,अब ग्रामीण लोकतंत्र के इस महापर्व के बेला में नाराज है की जब उनलोगो के मांग पर कोई प्रतिनिधि सुनते ही नहीं है तो विकास के नाम पर वोट क्यों ,नाराज ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से प्रदर्शन करते हुए प्रशासन को भी अपने भावनाओ से अवगत करवा दिया की इस गांव के लोगो ने रोड नहीं तो वोट नहीं का निर्णय मज़बूरी में नेताओ की वादा खिलाफी पर लिया है , 18 अप्रेल को है ,ऐसे में लोगों का ये विरोध जनप्रतिनिधियों के लिए सरदर्द शाबित हो सकता है ,वैसे जो भी नेता जीत कर जाते हैं लोगों से किये इन वादों पर जरूर सोचना चाहिए ताकि लोग इस तरह के कदम ना उठाये। वैसे हमारी ये अपील है की लोग अपने मताधिकार का प्रयोग जरूर करें ,क्योंकि आपका मत हो मजबूत लोकतंत्र का निर्माण करता है।

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