बिहार [कटिहार]_सुमन कुमार शर्मा__15 साल से सड़क का है इंतज़ार .
कटिहार का वो सड़क तीन प्रखंडो को जोड़ता है लेकिन आज ही सड़क जर्जर और गड्ढों में है तब्दील ,15 वर्षो में कई विधायक ,सांसद आये लेकिन नही बदली इस सड़क की तस्वीर ,आज भी लोग सड़क के इंतज़ार में ,5 हाज़र की आबादी वाले इस गाँव में लोग आज भी कीचड़ में चलने को हैं मजबूर ,गड्ढे में सड़क है या सड़क में गड्ढा पता ही नही चल रहा है ,
समेली प्रखण्ड के डुम्मर चौक से बकिया मरघिया गाँव की है ,जहाँ लगभग पांच हज़ार से ज्यादा की आबादी है जो हर दिन इसी कीचड भरे सड़क में चलने को मज़बूर हैं ,इलाके के लोग कहते हैं की पहले ये गाँव कोढ़ा विधानसभा का हिस्सा हुआ करता था लेकिन अब ये बरारी विधानसभा का हिस्सा है ,करीब 15 सालों से इस इलाके की सड़क का यही हाल है ,कई नेता आये वादे किये ,जीत कर लोकसभा और विधानसभा भी गए लेकिन इस तस्वीर को नहीं बदल पाए ,अब ये कीचड भरी सड़क लोगों की जरुरत बन चुकी है।
इस इलाके बुजुर्ग कहते हैं की 15 वर्षो में कई बार लोकसभा का चुनाव एवम विधानसभा का चुनाव हो गया पर सड़क नही बन पाया जबकि चुनाव में प्रत्यासी मतदाता को सड़क निर्माण की बात कह कर वोट के नाम पर राजनीतिक की गई, लेकिन सड़क नही बनाया गया, स्थानीय ग्रामीणों में जनप्रतिनिधियों को लेकर आक्रोश व्याप्त हैं, वही कहा जनप्रतिनिधियों ने हम सभी डूमर पंचायत के पांच हजार मतदाताओं को सिर्फ ठगा है। वहीँ बिहार के मुखिया विकास के नाम पर लोकसभा चुनाव में इस बार लोगों मेहनताना मांग रहे हैं। बिहार और केंद्र सरकार जहाँ एक तरफ देश से लेकर राज्य और गाँव गाँव गली गली सड़क बनाने का दावा कर लोगों को अपने पक्ष में कर रहे हैं वहीँ ये तस्वीर उन नेताओं के दावों और वादों की पोल खोल कर रख रहा है।
कटिहार का वो सड़क तीन प्रखंडो को जोड़ता है लेकिन आज ही सड़क जर्जर और गड्ढों में है तब्दील ,15 वर्षो में कई विधायक ,सांसद आये लेकिन नही बदली इस सड़क की तस्वीर ,आज भी लोग सड़क के इंतज़ार में ,5 हाज़र की आबादी वाले इस गाँव में लोग आज भी कीचड़ में चलने को हैं मजबूर ,गड्ढे में सड़क है या सड़क में गड्ढा पता ही नही चल रहा है ,
समेली प्रखण्ड के डुम्मर चौक से बकिया मरघिया गाँव की है ,जहाँ लगभग पांच हज़ार से ज्यादा की आबादी है जो हर दिन इसी कीचड भरे सड़क में चलने को मज़बूर हैं ,इलाके के लोग कहते हैं की पहले ये गाँव कोढ़ा विधानसभा का हिस्सा हुआ करता था लेकिन अब ये बरारी विधानसभा का हिस्सा है ,करीब 15 सालों से इस इलाके की सड़क का यही हाल है ,कई नेता आये वादे किये ,जीत कर लोकसभा और विधानसभा भी गए लेकिन इस तस्वीर को नहीं बदल पाए ,अब ये कीचड भरी सड़क लोगों की जरुरत बन चुकी है। इस इलाके बुजुर्ग कहते हैं की 15 वर्षो में कई बार लोकसभा का चुनाव एवम विधानसभा का चुनाव हो गया पर सड़क नही बन पाया जबकि चुनाव में प्रत्यासी मतदाता को सड़क निर्माण की बात कह कर वोट के नाम पर राजनीतिक की गई, लेकिन सड़क नही बनाया गया, स्थानीय ग्रामीणों में जनप्रतिनिधियों को लेकर आक्रोश व्याप्त हैं, वही कहा जनप्रतिनिधियों ने हम सभी डूमर पंचायत के पांच हजार मतदाताओं को सिर्फ ठगा है। वहीँ बिहार के मुखिया विकास के नाम पर लोकसभा चुनाव में इस बार लोगों मेहनताना मांग रहे हैं। बिहार और केंद्र सरकार जहाँ एक तरफ देश से लेकर राज्य और गाँव गाँव गली गली सड़क बनाने का दावा कर लोगों को अपने पक्ष में कर रहे हैं वहीँ ये तस्वीर उन नेताओं के दावों और वादों की पोल खोल कर रख रहा है।


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