सीमांचल में ओवैसी की एंट्री, वक्फ कानून के बहाने मुस्लिम वोटबैंक को साधने की कोशिश
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी इन दिनों बिहार के सीमांचल क्षेत्र के दौरे पर हैं। वक्फ कानून में संशोधन के खिलाफ जलसों में भाग लेने के साथ-साथ वे सीमांचल के जिलों में मुस्लिम समुदाय को राजनीतिक रूप से एकजुट करने की कोशिशों में जुटे हुए हैं।
ओवैसी ने हाल ही में किशनगंज में एक जनसभा को संबोधित करते हुए आगामी विधानसभा चुनावों के लिए प्रत्याशी तक घोषित कर दिया और पतंग चुनाव चिन्ह पर वोट देकर AIMIM को मजबूत करने की अपील की।
वक्फ कानून पर ओवैसी का हमला
अपने भाषणों में असदुद्दीन ओवैसी वक्फ कानून में संशोधन को मुसलमानों के खिलाफ बताया और संसद में इस कानून की प्रति को फाड़ देने की बात भी कही। वे बार-बार मंच से दावा कर रहे हैं कि उन्होंने इस कानून का विरोध सबसे पहले किया और अब जनता को इसके प्रति जागरूक कर रहे हैं।
राजद पर सीधा हमला, बागियों को लेकर नाराज़गी
अपने संबोधनों में ओवैसी सिर्फ केंद्र सरकार या वक्फ कानून पर ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) पर भी हमलावर हैं। उन्होंने अपनी पार्टी के चार विधायकों के RJD में शामिल होने पर नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा, “चार गए हैं, तो अब 24 आएंगे।” उनका इशारा इस ओर था कि AIMIM सीमांचल में फिर से अपनी पकड़ मज़बूत करेगी।
मुस्लिम वोट की अहम भूमिका
बिहार में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं और सीमांचल, जहाँ मुस्लिम आबादी का बड़ा हिस्सा है, राजनीतिक दलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र बन चुका है। सभी बड़ी पार्टियां—चाहे वो RJD हो, JDU या कांग्रेस—मुस्लिम वोटबैंक को साधने की कोशिश में लगी हैं। AIMIM की सक्रियता से इस इलाके की सियासत और भी दिलचस्प हो गई है।
AIMIM पर B-Team होने के आरोप
हालांकि AIMIM खुद को मुस्लिम समुदाय की आवाज़ बताती है, लेकिन विपक्षी दल उन्हें अक्सर “बी टीम” कहकर निशाना बनाते हैं—मतलब, बीजेपी को फायदा पहुँचाने वाली पार्टी। इस बारे में जब सीमांचल के लोगों से बात की गई तो कई लोगों ने कहा कि “सिर्फ मुस्लिम वोट से कोई चुनाव नहीं जीता जा सकता। अगर कोई दल मुस्लिमों को एकजुट वोट देने की अपील करता है, तो उसका सीधा लाभ ध्रुवीकरण के ज़रिए बीजेपी को मिलता है।”
यही कारण है कि AIMIM को कई बार ‘वोट कटवा’ और बीजेपी की ‘बी टीम’ कहा जाता है। हालांकि पार्टी इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करती है और खुद को संविधान व अल्पसंख्यकों की असली प्रतिनिधि बताती है।
राजनीति गरम, रणनीति तेज़
जैसे-जैसे चुनाव की तारीख़ करीब आ रही है, सीमांचल की ज़मीन पर राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है। AIMIM के जलसों, वक्फ कानून पर बहस और टिकटों के ऐलान ने यहां की सियासत को एक नई दिशा दे दी है। अब देखना यह है कि क्या ओवैसी की रणनीति सीमांचल में फिर से AIMIM को पैर जमाने का मौका देगी, या यह सियासी कोशिशें महज़ भीड़ तक सिमट कर रह जाएंगी।


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